Students of Sankarshan Das Adhikari Group Guidelines

All group applicants must be members of His Grace Sriman Sankarshan Das Adhikari’s Ultimate Self Realization Course.

Visit to sign up.

Group Email etiquette guidelines:

 1. Please always use relevant subject lines in emails – do not leave subject line blank but don’t use generic subject lines like “Hare Krishna” or “hello” – subject line should indicate summary of your email content.

2. Do not use convenient shortening of word like ‘cuz’ and ‘bcos’ and so on.

3. Do not use all caps.

4. Check your computer and email accounts for virus attacks – ensure your email does not become instrument for irrelevant useless emails.

5. Check your email for completeness, grammar and clarity before hitting “send”.

6. Please avoid one-liners and back-and-forth banter – please remember that each of your emails are read by hundreds and thousands of students from around the world. Each email should add some value to the discussion, even if you wish to express your appreciation, then please don’t write a one-liner like “Haribol!”, instead, if you do wish to appreciate, then please take the time and effort to express why specifically you appreciate the responses.

Guidelines for proper usage of our group

The primary purpose for this mailing list is so we can serve. Serve who?

1. Our spiritual master, mentor, friend, best well-wisher, and guide, His Grace Sri Sankarshan Das Adhikari, the disciplic succession that he represents, the International Society for Krishna Consciousness, and Srila Prabhupada, and in this way, serve Krishna together.

2. Each other, as students and disciples, it is our duty and great privilege to help each other along the path. These are symptoms of loving exchanges described by our teachers.

3. Every other living entity we come across, suffering in so many different ways.


In order to make our experience positive, there are a few guidelines to keep in mind:

 1. Content: Please be mindful of what you are saying/writing… remember it will be read by hundreds, even thousands of individuals around the world, all at different levels of advancement, different cultural backgrounds, and different languages. Short and to-the-point, polite, courteous, and always fair.

2. Purpose, Relevance & Tone: Ask yourself – does this make everyone more Krishna conscious, or less Krishna conscious. If it is not relevant to the purpose of furthering Krishna Consciousness, even remotely likely to excite controversy, confuse, misguide, anger, disappoint, or cause any negative emotion, please, please send a private message instead. Also, excessive forwarded emails and irrelevant content will simply distract everyone.

3. Time, place, and circumstance: Please always keep in mind that everything cannot be discussed in open and in public, many items may confuse or misunderstand. For example, you may know someone else, you can always ask an offline question.

Our goal is to build a global community of dedicated, sincere seekers united in lovingly serving our teacher, His Grace Sri Sankarshan Das Adhikari, dedicated disciple of His Divine Grace A. C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada, ISKCON Founder Acarya.

If you have any questions or comments on when, how, and when you should post on this list, please ask us offline.

Also, please note some important items:

 1.  Inquiries should be made in a humble mood, and must actually matter to the person asking.  This means that questions should not be intended to spark an argument for argument’s sake.

2.  All philosophical statements should include at least one reference to guru, sadhus, and sastra. 

3.  Only as many sastric references as needed to establish a point should be used, so that we don’t end up with needlessly long posts.

4.  Respect the people who are posting.  If you don’t respect them, write as if you do anyway.

5. Anyone who does not abide by these principles will be contacted off the list for the purpose of seeing what the heart of the issue is.  If they don’t agree to follow the rules, they will be disallowed to post until they demonstrate proper etiquette consistently.




समूह में सभी पत्र व्यव्हार केवल अंग्रेजी भाषा में होना चाहिए


   १)   ई मेल भेजते समय पद (Post) सम्बंधित विषय के शीर्षक  का उल्लेख Subject  लाइन  में अवश्य करें | शीर्षक   में आपके पद  (Post) का  विवरण  अति  संक्षेप  में होना चाहिए | ऐसा  करने  से  पाठकों की रूचि आपके पदों  (Post )को पढने में बढ़ेगी | Subject  लाइन में  “  हरे कृष्णा  ”  या फिर केवल  “Hello ”  जैसे शीर्षकों का  प्रयोग नहीं करें |

   २)  शब्दों  को अपनी सुविधा के अनुसार छोटा कर के नहीं लिखें,  जैसे कि Cuz, Bcos इत्यादि का प्रयोग नहीं करें |

   ३)  अपने पदों  (Posts)को  केवल बड़े अक्षरों (Capital Letters)  में  नहीं  भेजें  |

   ४)  अपने Computer  और  Email account  को Viruses  से बचाएं | Email भेजने से पहले यह  सुनिश्चित कर ले कि उसमें  Virus  नहीं  हो | जिस से कि आपका मेल अप्रासंगिक और व्यर्थ की Emails का  कारण व स्रोत नहीं  बने |

   ५)  मेल भेजने से पहले यह अवश्य देख लें की यह विषय वस्तु से पूर्ण हो, लेख स्पष्ट हो और उसमें  व्याकरण की गलतियाँ नहीं हों |

   ६)  कृपया एक लाइन की  Mails जैसे की ” हरी बोल ” इत्यादि नहीं भेजें | यदि आपको  कोई  विषय या कोई विचार  अच्छा  लगता है ,  आपको  भक्ति पथ पर आगे बढ़ने में प्रेरित करता है  अतः  आप प्रेषक के प्रति अपने आभार प्रकट करना चाहते हैं तो थोड़ा सा समय निकालिए और  संक्षिप्त   विवरण   के साथ;  जो भी बात आपको अच्छी  लगी हो ,  आप अपना  आभार प्रकट कर सकते हैं | चूँकि इन सब  Posts / Emails को सम्पूर्ण विश्व में कई लाख लोग पढ़ते हैं इसलिए हमारे ग्रुप कि एक एक Email  बहुत ही सारगर्भित होनी चाहिए  जिस से  कि  हर  एक पाठक ज्ञान बढ़े , उसकी अध्यात्मिक ज्ञान में उन्नति हो  |


समूह (group) केउपयोगसेसम्बंधितदिशानिर्देश


इस समूह को शुरू करने का मूलभूत उद्द्येश्य है सेवा करना , पर किसकी  सेवा करना :


१) परमेश्वर श्री कृष्ण की – अपने अध्यात्मिक गुरु, मित्र , शुभचिंतक  और शिक्षक श्रीमान  संकर्षण दास अधिकारी  के माध्यम से ,  जो  कि  ISKCON और  ब्रह्म माधव गौडीय सम्प्रदाय  की गुरु परंपरा  का  प्रतिनिधित्व  करते हैं |

२) यह हमारा  परम सौभाग्य और कर्त्तव्य है की हम एक दूसरे की सेवा करें – एक विद्यार्थी की तरह और एक शिष्य की तरह | इस तरह के प्रेम का आदान प्रदान हमारे गुरुओं द्वारा बताया गया है |

३) हर वो एक जीव जिससे हम इस संसार में मिलते हैं विभिन्न  प्रकार के कष्टों से पीड़ित है , जूझ रहा है |अतः हमें उनकी भी सेवा करनी है |


समूह (group) में अपने सकारात्मक अनुभवों  की प्राप्ति के लिए हमें निम्न दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए |


    १)      विषय वस्तु : हमें सदैव ध्यान रखना  चाहिए कि हम अपने जो विचार या मत या अनुभव इस समूह (group) में व्यक्त करते हैं  उसे विश्व  भर में कई हजारों , लाखों लोग पढ़ते हैं |  इसमें जो एक बात ध्यान देने योग्य है ;वह यह,  की उन सब लोगों की भाषा, संस्कृति हमसे अलग होती है और उन सबका भक्ति मार्ग का स्तर भी अलग अलग  होता है| कुछ लोग नए भक्त होते हैं और कुछ भक्ति मार्ग में काफी उन्नत होते हैं, उच्च कोटि के भक्त होते हैं| अतः हमें उचित विचार  संक्षेप में, सारगर्भित और  विनम्र तरीके से  व्यक्त करने  प्रयास करना चाहिए|

    २)      उद्द्येश्य  और  प्रासंगिकता  :  अपने विचार व्यक्त करने से पहले हमें यह देखना चाहिए कि जो कुछ भी हम कह रहे हैं  वह पाठकों के  कृष्ण भावना भावित होने के प्रयास को बढ़ाएगा या कि कम करेगा | अगर हमारा विचार किसी भी पाठक के  कृष्ण भावना भावित होने प्रयास को आगे बढ़ाने में मदद नहीं करता , और यदि यह किसी भी प्रकार का विवाद , भ्रम, या किसी को बहकाने जैसा हो सकता है , क्रोध दिला सकता है , निराशा पैदा करने वाला  या किसी और तरह का नकारात्मक भावना उत्पन्न करने वाला है या हो  सकता है, तो कृपा कर के ऐसा विचार या सन्देश समूह (group) में न भेजें | अगर बहुत जरूरी लगे तो व्यक्तिगत (personal) मेल ही करें | हमें इस बात का  ध्यान रखना चाहिए कि जरूरत से ज्यादा forwarded  मेल  और अप्रासंगिक विषयवस्तु से केवल पाठकों का ध्यान भंग होता है, और हमारा उद्द्येश्य है कि हम हर एक और सब किसी कि  कृष्ण भावना भावित होने के प्रयास में सहायता करें |

   ३)      समय, स्थानऔरपरिस्थितियां हमें सदैव यह ध्यान में रखना चाहिए कि हर एक विषय कि हम सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं कर सकते क्योंकि कई विषय ऐसे होते हैं जो कि कुछ लोगों को  भ्रमित कर सकते हैं या फिर वो कुछ का कुछ और अर्थ निकल सकते हैं| अगर समूह में आप किसी और को जानते हैं तो आप उससे व्यक्तिगत मेल पर  या फिर offline  प्रश्न पूँछ सकते हैं|

   ४)      हमारा लक्ष्य या है कि हम  समर्पित,  ईमानदार  साधकों के   एक वैश्विक समुदाय का  गठन करे जो कि एक साथ प्रेम से जुट कर  – श्रीमान संकर्षण दास अधिकारी  ,  जो कि श्रील ए सी भक्तिवेदंता स्वामी प्रभुपद-  जो कि ISKCON  के संस्थापक आचार्य हैं,  के परम प्रिय शिष्य और हम लोगों के  भक्ति मार्ग के शिक्षक हैं, उनकी प्रेम से सेवा कर सकें |

   ५)      अपने विचारों को समूह (group) में पोस्ट करने से सम्बंधित यदि आपका कोई प्रश्न या विचार हो तो आप हमसे ऑफलाइन संपर्क कर सकते हैं |


इसके अतिरिक्त और कुछ निम्लिखित महत्वपूर्ण बातों का हमें ध्यान रखना चाहिए |


   )      जो भी प्रश्न हमसे या हमारे परिवार  के सदस्यों की भक्ति मार्ग से सम्बंधित समस्याओं से सम्बंधित हैं हम उन्हें जरूर पूंछे  परन्तु बहुत ही विनम्र भाव से | प्रश्न पूंछते समय हमारी भाषा (language) का विनम्र होना बहुत ही जरूरी ही , जिससे की हमारे प्रश्नप्रश्न ही लगें ना  की तर्क या बहस |

    )      हमें अपने हर एक दार्शनिक (philosophical) वाक्य में कम से कम एकगुरु, साधू या शास्त्र का उद्धरण  अवश्य देना चाहिए | ऐसा करने से पाठकों को उस वाक्य कि गरिमा और प्रभाव का पता चलेगा |

    )   किसी भी तथ्य को स्थापित करने के लिए जितने  सन्दर्भों (शास्त्रों के ) की आवश्यकता हो उतने ही दे अधिक नहीं ; अन्यथा पद (Posts) अधिक लम्बे हो जायेंगे और पाठको की रूचि भी उसको पढने में समाप्त  हो जाएगी |

    )  जो लोग पद लिख रहें हैं हमें उनका सदैव सम्मान करना चाहिए | यह एक शिष्टाचार है |

 यदि कोई भी ऊपर बताये गए इन नियमों का पालन नहीं करता है तो हम उससे संपर्क कर के  उसके इस प्रकार के व्यवहार का कारण जानने  का प्रयत्न करेंगे | इसके बाद भी यदि वह ग्रुप  के नियमों का पालन नहीं करता है तो उसे ग्रुप  में पोस्ट करने की अनुमति तब तक नहीं दी जाएगी जब तक की वह उचित शिष्टाचार ग्रुप के नियमों के अनुसार  नहीं दिखाता |


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